माँ लक्ष्मी जी की आरती
Maa Lakshmi Aarti • 4 पावन पद
"ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता"
धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य एवं सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी माँ महालक्ष्मी जी की मंगलकारी आरती।
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥
Ōṁ Jaya Lakṣhmī Mātā, Maiyā Jaya Lakṣhmī Mātā. Tumakō nisadina sēvata, Hara Viṣhṇu Vidhātā.. Ōṁ Jaya Lakṣhmī Mātā..
हे माँ महालक्ष्मी, आपकी जय हो! भगवान शिव, श्री हरि विष्णु और विधाता ब्रह्मा जी नित्य आपकी सेवा और वंदना करते हैं।
Hail Mother Lakshmi, worshipped unceasingly by Shiva, Vishnu, and Brahma.
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ दुर्गा रूप निरञ्जनी, सुख सम्पति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥
Umā, Ramā, Brahmāṇī, tuma hī jaga-mātā. Sūrya-chandramā dhyāvata, Nārada r̥ṣhi gātā.. Ōṁ Jaya Lakṣhmī Mātā..
आप ही उमा, रमा और ब्रह्माणी रूप में संपूर्ण जगत की माता हैं। सूर्य-चन्द्र आपका ध्यान धरते हैं और देवर्षि नारद आपका यश गाते हैं।
You are the supreme Mother as Uma, Rama, and Brahmani; revered by celestial luminaries and sage Narada.
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। सब सम्भव हो जाता, मन नहिं घबराता॥ तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता। रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहिं पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥
Jisa ghara mēṁ tuma rahatīṁ, saba sadguṇa ātā. Saba sambhava hō jātā, mana nahiṁ ghabarātā.. Ōṁ Jaya Lakṣhmī Mātā..
जिस घर में आपका वास होता है, वहाँ समस्त सद्गुण और सफलता का संचार होता है। आपके बिना कोई यज्ञ, अन्न-वस्त्र अथवा ऐश्वर्य संभव नहीं है।
In whose home You reside, virtues and fearlessness dwell; all sacrificial offerings and earthly bounty originate from You.
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गावै। उर आनन्द समावै, पाप उतर जावै॥ ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
Mahālakṣhmījī kī āratī, jō kōī nara gāvai. Ura ānanda samāvai, pāpa utara jāvai.. Ōṁ Jaya Lakṣhmī Mātā..
जो भी नर-नारी माँ महालक्ष्मी की यह आरती गाते हैं, उनके हृदय में परमानंद का वास होता है और समस्त पापों का क्षय हो जाता है।
Whoever recites this Aarti of Mahalakshmi experiences supreme inner joy and is purged of all sins.
दीपावली, शुक्रवार अथवा नित्य संध्याकाल में घी के दीपक और सुगंधित धूप से आरती करें।
दरिद्रता का नाश, धन-वैभव, व्यापार वृद्धि, परिवार में सुख-शांति एवं अष्टलक्ष्मी की कृपा।
अन्य प्रमुख आरतियाँ (More Aartis)
श्री गणेश जी की आरती
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
卐 देवाधिदेव महादेव शिवभगवान शिव जी की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा
卐 भगवान हनुमान (बजरंगबली)श्री हनुमान जी की आरती
आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की
卐 माँ दुर्गा (जगदम्बा)माँ दुर्गा जी की आरती
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
卐 माँ सरस्वतीमाँ सरस्वती जी की आरती
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता
卐 मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री रामप्रभु श्री राम चन्द्र जी की आरती
आरती कीजै श्री रघुवर जी की, सत चित आनंद रूप सुघर जी की