वर्ण व्यवस्था: जन्म से या कर्म, गुण और स्वभाव से?
हिंदू धर्म में वर्ण व्यवस्था मूल रूप से जन्म पर आधारित थी।
वर्ण व्यवस्था को समझने के लिए केवल जन्म-आधारित जाति व्यवस्था को उसका मूल स्वरूप मानना पर्याप्त नहीं है। प्रस्तुत शोध वैदिक ग्रंथों, उपनिषदों, महाभारत, रामायण, स्मृति ग्रंथों और ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर यह तर्क रखता है कि प्राचीन वर्ण-धारणा में कर्म, गुण और स्वभाव की महत्वपूर्ण भूमिका थी।