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भगवान श्री गणेश बीज मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः॥

श्री गणेश मंत्र संग्रह

Shree Ganesh Mantra Sangrah • वैदिक एवं पौराणिक सिद्ध मंत्र

प्रथम पूज्य, बुद्धिदाता एवं समस्त विघ्नों का नाश करने वाले भगवान श्री गणेश के सिद्ध एवं चमत्कारी मंत्र। किसी भी शुभ कार्य, पूजा अथवा अध्ययन से पूर्व इनका जप परम कल्याणकारी है।

📿 जप विधि व नियम: प्रातः काल पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके लाल आसन पर बैठें। रुद्राक्ष अथवा रक्तचंदन की माला से कम से कम 108 बार जप करें।
✨ मंत्र फल व लाभ: कार्यों में आने वाली समस्त रुकावटों और विघ्नों का नाश, बुद्धि, विवेक, विद्या, धन-समृद्धि एवं नवकार्यों में अपार सफलता प्राप्त होती है।
4 सिद्ध मंत्र
108 जप संख्या
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समस्त 4 सिद्ध मंत्र श्लोक
#1 गणेश मूल / बीज मंत्र (Ganesh Beej Mantra)

ॐ गं गणपतये नमः॥

Om Gam Ganapataye Namaha॥

भावार्थ (Meaning): समस्त विघ्नों के विनाशक और देवताओं में प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश को मेरा बारंबार नमन है।
English: Salutations to Lord Ganesha, the supreme lord of all ganas and remover of all obstacles.
📿 अनुशंसित जप: 108 बार प्रामाणिक वैदिक पाठ
#2 वक्रतुण्ड महाकाय श्लोक (Vakratunda Mahakaya Shloka)

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

Vakratunda Mahakaya Suryakoti Samaprabha। Nirvighnam Kuru Me Deva Sarvakaryeshu Sarvada॥

भावार्थ (Meaning): घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर वाले और करोड़ों सूर्यों के समान दिव्य तेजस्वी हे भगवान गणेश! मेरे समस्त कार्यों को सदा विघ्नरहित और सफल कीजिए।
English: O Lord Ganesha with a curved trunk, immense body, and the brilliance of millions of suns, please make all my endeavors free of obstacles forever.
📿 अनुशंसित जप: 21 बार प्रामाणिक वैदिक पाठ
#3 गणेश गायत्री मंत्र (Ganesh Gayatri Mantra)

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥

Om Ekadantaya Vidmahe Vakratundaya Dhimahi। Tanno Dantih Prachodayat॥

भावार्थ (Meaning): हम उन एकदन्त और वक्रतुण्ड भगवान गणेश का ध्यान करते हैं, वे ज्ञान और शक्ति के दाता हमें सद्बुद्धि और सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
English: We meditate on the one-tusked Lord with a curved trunk. May that divine Lord illuminate our intellect and guide us on the righteous path.
📿 अनुशंसित जप: 108 बार प्रामाणिक वैदिक पाठ
#4 संकटनाशन गणेश स्तोत्र मंत्र (Sankata Nashana Mantra)

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्। भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुःकामार्थसिद्धये॥

Pranamya Shirasa Devam Gauriputram Vinayakam। Bhaktavasam Smarennityamayuh Kamartha Siddhaye॥

भावार्थ (Meaning): माता गौरी के नंदन भगवान विनायक को सिर झुकाकर प्रणाम करते हुए, भक्त को अपनी आयु, कामना, अर्थ और सिद्धि की प्राप्ति हेतु नित्य उनका स्मरण करना चाहिए।
English: Bowing one's head to Lord Vinayaka, the son of Gauri, devotees who meditate upon Him daily attain longevity, fulfillment of desires, and prosperity.
📿 अनुशंसित जप: 21 बार प्रामाणिक वैदिक पाठ