गायत्री महामंत्र संग्रह
Gayatri Mahamantra Sangrah • वैदिक एवं पौराणिक सिद्ध मंत्र
वेदों की जननी, संपूर्ण सनातन धर्म का परम तेजस्वी महामंत्र। सूर्य सविता देव के दिव्य प्रकाश का ध्यान करते हुए सद्बुद्धि एवं आत्मज्ञान की प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ साधन।
मंत्र साधना एवं दैनिक जप
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ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥
Om Bhur Bhuvah Svaha Tat Savitur Varenyam Bhargo Devasya Dhimahi। Dhiyo Yo Nah Prachodayat॥
मुक्ताविद्रुमहेमनीलधवलच्छायैर्मुखैस्त्रीक्षणै- र्युक्तामिन्दुनिबद्धरत्नमुकुटां तत्त्वार्थवर्णात्मिकाम्। गायत्रीं वरदाभयाङ्कुशकशाः शुभ्रं कपालं गदां शंखं चक्रमथारविन्दयुगलं हस्तैर्वहन्तीं भजे॥
Mukta Vidruma Hema Nila Dhavala Chhayair Mukhais Tryakshanair Yuktam Indu Nibaddha Ratna Mukutam Tattvartha Varnatmikam। Gayatrim Varadabhayankusha Kashah Shubhran Kapalam Gadam Shankham Chakram Atharavinda Yugalam Hastair Vahantim Bhaje॥