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यजुर्वेद

Adhyaya 40

Yajurveda (यजुर्वेद)

यजुर्वेद • अध्याय 40

Adhyaya 40

17 Mantras Loaded
Mantra 40.1

ई॒शा वा॒स्यमि॒दंꣳ सर्वं॒ यत्किञ्च॒ जग॑त्यां॒ जग॑त् । तेन॑ त्य॒क्तेन॑ भुञ्जीथा॒ मा गृ॑धः॒ कस्य॑ स्वि॒द्धन॑म् ॥ (१)

हि हिन्दी अनुवाद

इस जड़चेतन जगत्‌ में जो कुछ भी है, वह ईश्वर की कृपा से है. उस ईश्वर के द्वारा त्यागे गए का भोग कीजिए. बहुत ज्यादा लालच मत करो. यह धनादि सब किस का है? (अर्थात्‌ ईश्वर के अलावा किसी का नहीं). (१)

EN English Translation

Whatever is in this root conscious world is by the grace of God. Enjoy the one forsaken by that God. Don't covet too much. Whose wealth all this belongs to? (i.e. of none other than God). (1)

Mantra 40.2

कु॒र्वन्ने॒वेह कर्मा॑णि जिजीवि॒षेच्छ॒तꣳ समाः॑ । ए॒वं त्वयि॒ नान्यथे॒तोऽस्ति॒ न कर्म॑ लिप्यते॒ नरे॑ ॥ (२)

हि हिन्दी अनुवाद

हे ईश्वर! हम कर्म करते हुए सौ वर्ष तक जीने की इच्छा करें. इस के अलावा कल्याण का कोई अन्य मार्ग नहीं है. कर्म मनुष्य को लिप्त नहीं करते. (२)

EN English Translation

O God! Let us want to live for a hundred years while doing karma. Apart from this, there is no other path to welfare. Deeds do not involve human beings. (2)

Mantra 40.3

अ॒सु॒र्य्याः᳕ नाम॒ ते लो॒काऽअ॒न्धेन॒ तम॒सावृ॑ताः । ताँस्ते प्रेत्यापि॑ गच्छन्ति॒ ये के चा॑त्म॒हनो॒ जनाः॑ ॥ (३)

हि हिन्दी अनुवाद

जो गहन अंधकार से घिरे रहते हैं, वे लोग असुर्य कहलाते हैं. जो आत्मा का हनन करने बाले हैं, वे लोग प्रेत रूप में वैसे ही लोकों को प्राप्त होते हैं. (३)

EN English Translation

Those who are surrounded by deep darkness are called asurayas. Those who are going to violate the soul, they get the same worlds in the form of ghosts. (3)

Mantra 40.4

अने॑ज॒देकं॒ मन॑सो॒ जवी॑यो॒ नैन॑द्दे॒वाऽआ॑प्नुव॒न् पूर्व॒मर्ष॑त् । तद्धाव॑तो॒ऽन्यानत्ये॑ति॒ तिष्ठ॒त्तस्मि॑न्न॒पो मा॑त॒रिश्वा॑ दधाति ॥ (४)

हि हिन्दी अनुवाद

अजन्मा ईश्वर एक है. वह मन से भी ज्यादा गतिवान और फुरतीला है. देवगण भी इसे प्राप्त नहीं कर पाते हैं. स्थिर रह कर भी वह दौड़ता हुआ गतिशीलों को पछाड़ देता है. वह जल में रहता है. वायु को धारण करता है. (४)

EN English Translation

The unborn God is one. She is more dynamic and agile than the mind. Devgans are also not able to achieve this. Even when it is still, it beats the moving dynamics. He lives in water. It holds air. (4)

Mantra 40.5

तदे॑जति॒ तन्नैज॑ति॒ तद् दू॒रे तद्व॑न्ति॒के । तद॒न्तर॑स्य॒ सर्व॑स्य॒ तदु॒ सर्व॑स्यास्य बाह्य॒तः ॥ (५)

हि हिन्दी अनुवाद

"बह (परम तत्त्व) गतिशील है और स्थिर भी है. बह दूर भी है और निकट भी है बह जड़ और चेतन दोनों के भीतर भी है और बाहर भी है. (५)

EN English Translation

English translation not available.

Mantra 40.6

यस्तु सर्वा॑णि भू॒तान्या॒त्मन्ने॒वानु॒पश्य॑ति । स॒र्व॒भू॒तेषु॑ चा॒त्मानं॒ ततो॒ न वि चि॑कित्सति ॥ (६)

हि हिन्दी अनुवाद

जो सभी प्राणियों (जड्चेतन) में अपने को (आत्मतत्त्व को) देखता है तथा उस का अनुभव करता है, उसे कभी भी कोई भ्रम नहीं होता. (६)

EN English Translation

One who sees and experiences himself (atma-tattva) in all beings (subconscious) never has any illusions. (6)

Mantra 40.7

यस्मि॒न्त्सर्वा॑णि भू॒तान्या॒त्मैवाभू॑द्विजान॒तः । तत्र॒ को मोहः॒ कः शोक॑ऽएकत्वम॑नु॒पश्य॑तः ॥ (७)

हि हिन्दी अनुवाद

जिस (स्थिति) में मनुष्य यह जान लेता है कि सभी भूतों में एक ही आत्मतत्त्व है, तब क्या मोह? क्या शोक ? उसे सर्वत्र एक जैसी स्थिति दिखाई देती है. (७)

EN English Translation

What is the attachment when man knows that all beings have the same self-essence? What sorrow? He sees the same situation everywhere. (7)

Mantra 40.8

स पर्य॑गाच्छु॒क्रम॑का॒यम॑व्र॒णम॑स्नावि॒रꣳ शु॒द्धमपा॑पविद्धम् । क॒विर्म॑नी॒षी प॑रि॒भूः स्व॑य॒म्भूर्या॑थातथ्य॒तोऽर्था॒न् व्यदधाच्छाश्व॒तीभ्यः॒ समा॑भ्यः ॥ (८)

हि हिन्दी अनुवाद

वह परमपिता सर्वव्यापक, चमकीला, दीप्तिमान, काया रहित, नाड़ियों से रहित है. वह घावों से रहित, पवित्र, पाप रहित, विद्वान्‌, मननशील, सर्वव्यापक व स्वयंभू (स्वयं उत्पन्न होने वाला) है. उस ने सृष्टि के आरंभ से ही सब के लिए यथायोग्य साधन सुविधाओं की व्यवस्था की है. (८)

EN English Translation

The Supreme being is omnipresent, bright, radiant, without body, devoid of nerves. He is free from wounds, divine, without sin, scholarly, contemplative, omnipresent and self-sufficient. He has provided suitable facilities for everyone since the beginning of creation. (8)

Mantra 40.9

अ॒न्धन्तमः॒ प्र वि॑शन्ति॒ येऽस॑म्भूतिमु॒पास॑ते । ततो॒ भूय॑ऽइव॒ ते तमो॒ यऽउ॒ सम्भू॑त्या र॒ताः ॥ (९)

हि हिन्दी अनुवाद

जो व्यक्ति विनाश की उपासना करते हैं, वे घोर अंधकार में प्रवेश करते हैं. जो संभूति (सृजन) के उपासक हैं, वे भी वैसे ही अंधकार में प्रवेश करते हैं. (९)

EN English Translation

Those who worship destruction enter the darkness. Those who are worshippers of sambhuti (creation) also enter darkness in the same way. (9)

Mantra 40.10

अ॒न्यदे॒वाहुः स॑म्भ॒वाद॒न्यदा॑हु॒रस॑म्भवात् । इति॑ शुश्रुम॒ धीरा॑णां॒ ये न॒स्तद्वि॑चचक्षि॒रे ॥ (१०)

हि हिन्दी अनुवाद

अन्य देवों ने संभव से असंभव के बारे में विशेष रूप से कहा है. हम ने उन धीर पुरुषों से जाना है कि संभव से असंभव का प्रभाव उस से अलग है. (१०)

EN English Translation

Other devas have said specifically about the impossible than possible. We have known from those patient men that the effect of the impossible is different from that. (10)

Mantra 40.11

सम्भू॑तिं च विना॒शं च॒ यस्तद्वेदो॒भय॑ꣳ स॒ह । वि॒ना॒शेन॑ मृ॒त्युं ती॒र्त्वा सम्भू॑त्या॒मृत॑मश्नुते ॥ (११)

हि हिन्दी अनुवाद

सृजन और विनाश इन दोनों को साथसाथ ही समझिए. विनाश से मृत्यु को तैरकर और सृजन से अमृत की प्राप्ति की जाती है. (११)

EN English Translation

Understand both creation and destruction together. Nectar is obtained by floating death from destruction and by creation. (11)

Mantra 40.12

अ॒न्धन्तमः॒ प्र वि॑शन्ति॒ येऽवि॑द्यामु॒पास॑ते । ततो॒ भूय॑ऽइव॒ ते तमो॒ यऽउ॑ वि॒द्याया॑ र॒ताः ॥ (१२)

हि हिन्दी अनुवाद

जो अज्ञान की उपासना करते हैं, वे गहरे अंधकार में प्रवेश करते हैं. जो ज्ञान की उपासना करते हैं, वे भी फिर वैसे ही गहरे अंधकार में प्रवेश करते हैं. (१२)

EN English Translation

Those who worship ignorance enter deep darkness. Those who worship knowledge also enter deep darkness. (12)

Mantra 40.13

अ॒न्यदे॒वाहुर्वि॒द्याया॑ऽअ॒न्यदा॑हु॒रवि॑द्यायाः । इति॑ शुश्रुम॒ धीरा॑णां॒ ये न॒स्तद्वि॑चचक्षि॒रे ॥ (१३)

हि हिन्दी अनुवाद

हम ने धीर पुरुषों से विशेष रूप से जाना है कि विद्या का प्रभाव कुछ और होता है. अविद्या का प्रभाव कुछ और होता है. (१३)

EN English Translation

We have learned from patient men in particular that the effect of education is something else. The effect of ignorance is something else. (13)

Mantra 40.14

वि॒द्यां चावि॑द्यां च॒ यस्तद्वेदो॒भय॑ꣳ स॒ह । अवि॑द्यया मृ॒त्युं ती॒र्त्वा वि॒द्यया॒मृत॑मश्नुते ॥ (१४)

हि हिन्दी अनुवाद

विद्या और अविद्या दोनों को ही साथसाथ समझिए. अविद्या से मृत्यु को पार किया जाता है. विद्या से अमृत तत्त्व को पाया जाता है. (१४)

EN English Translation

Understand both learning and avidya together. Death is overcome by avidya. Amrit Tattva is found from vidya. (14)

Mantra 40.15

वा॒युरनि॑लम॒मृत॒मथे॒दं भस्मा॑न्त॒ꣳ शरी॑रम् । ओ३म् क्रतो॑ स्मर । क्लि॒बे स्म॑र । कृ॒तꣳ स्म॑र ॥ (१५)

हि हिन्दी अनुवाद

यह शरीर वायु, अमृत आदि से बना हुआ है. शरीर नाशवान है. हे यजमान! आप ओम्‌ तथा अपनी क्षमता और किए गए कर्मो का स्मरण करो. (१५)

EN English Translation

This body is made of air, nectar etc. The body is perishable. O host! Remember om and your ability and the deeds you have done. (15)

Mantra 40.16

अग्ने॒ नय॑ सु॒पथा॑ रा॒येऽअ॒स्मान् विश्वा॑नि देव व॒युना॑नि वि॒द्वान् । यु॒यो॒ध्यस्मज्जु॑हुरा॒णमेनो॒ भूयि॑ष्ठां ते॒ नम॑ऽउक्तिं विधेम ॥ (१६)

हि हिन्दी अनुवाद

हे अग्नि! आप हमें श्रेष्ठ मार्ग पर ले जाइए. आप हमें ऐसे ही मार्ग से धन दिलाइए. हे विशव! आप विद्वान्‌ हैं. हम बारबार आप को नमन करते हैं. हम बारबार आप से अनुरोध करते हैं. आप हमें पापों से बचाने की कृपा करें. (१६)

EN English Translation

O agni! You take us on the best path. You give us money through such a route. O world! You are a scholar. We salute you again and again. We repeatedly request you. Please save us from sins. (16)

Mantra 40.17

हि॒र॒ण्मये॑न॒ पात्रे॑ण स॒त्यस्यापि॑हितं॒ मुखम् । यो॒ऽसावा॑दि॒त्ये पु॑रुषः॒ सोऽसाव॒हम् । ओ३म् खं ब्रह्म॑ ॥ (१७)

हि हिन्दी अनुवाद

सत्य का मुंह स्वर्णमय पात्र से ढका हुआ है. वह जो आदित्य पुरुष है, वह मैं हुं. आकाश में ओम्‌ रूप में ब्रह्म ही व्याप्त है. (१७)

EN English Translation

The mouth of truth is covered with a golden vessel. The Aditya man he is, that's me. Brahman is prevalent in the sky in the form of Om. (17)