Popular:
🪔 देवगुरु बृहस्पति | गुरु कृपा आरती

श्री बृहस्पति देव जी की आरती

Brihaspati Dev Aarti • 1 पावन पद

"जय बृहस्पति देवा, ॐ जय बृहस्पति देवा"

देवताओं के गुरु, ज्ञान, विद्या, धर्म एवं सौभाग्य के स्वामी श्री बृहस्पति देव जी की मंगल आरती।

2 दर्शन | 1 पद
1 टेक व पद

जय बृहस्पति देवा, ॐ जय बृहस्पति देवा। छिन छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा॥ तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी॥ पीताम्बर साजे अङ्गे, मुकुट शीश सोहे। स्वर्ण सिंहासन बैठे, त्रिभुवन जन मोहे॥ जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे। सकल मनोरथ पूरण, सुख सम्पति पावे॥

Jaya Br̥haspati Dēvā, Ōṁ Jaya Br̥haspati Dēvā. Chhina chhina bhōga lagāūṁ, kadalī phala mēvā.. Pītāmbara sājē aṅgē, mukuṭa shīṣha sōhē.. Sakala manōratha pūraṇa, sukha sampati pāvē..

सरल हिंदी भावार्थ:

हे देवगुरु बृहस्पति, आपकी जय हो। पीताम्बर धारी, स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान प्रभु आपकी कृपा से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

English Meaning:

Hail Lord Brihaspati, preceptor dressed in yellow garments, seated on golden throne, fulfilling all cherished aspirations.

आरती विधि एवं नियम

गुरुवार को पीले पुष्प, चने की दाल, मुनक्का एवं पीले दीपक से पूजन के उपरांत आरती करें।

आरती के लाभ एवं फल

विद्या, उच्च शिक्षा, विवाह में आ रही बाधाओं का निवारण, ज्ञान-वृद्धि एवं गुरु कृपा की प्राप्ति।