माँ सीता जी की आरती
Maa Sita Aarti • 1 पावन पद
"आरती श्री जनक दुलारी की, सीता जी रघुवर प्यारी की"
त्याग, तपस्या, पातिव्रत्य एवं क्षमा की प्रतिमूर्ति माता जानकी जी की पावन आरती।
आरती श्री जनक दुलारी की, सीता जी रघुवर प्यारी की॥ जनक सुता जग जननी माता, महिमा अमित न जाइ बखाना॥ कमल नयन मुख चन्द्र समाना, सब सुख खानि दया की धाना॥ श्री रघुनाथ संग सोहे जानकी, आरती श्री जनक दुलारी की॥ प्रेम सहित जो आरती गावै, सो भव सिन्धु पार होइ जावै॥
Āratī Shrī Janaka dulārī kī, Sītā jī Raghuvara pyārī kī.. Janaka sutā jaga jananī mātā.. Prēma sahita jō āratī gāvai, sō bhava sindhu pāra hōi jāvai..
जनक नंदिनी, श्री रघुवर की प्राणप्रिया माता सीता की यह आरती जो गाते हैं, वे सहज ही भवसागर से पार उतर जाते हैं।
Daughter of Janaka and beloved of Rama, whose grace delivers devotees effortlessly across the ocean of worldly trials.
जानकी नवमी अथवा रामायण पाठ के समय श्री सीताराम दरबार के सम्मुख आरती करें।
पति-पत्नी में अटूट प्रेम, सद्गुण, सहनशीलता, पवित्रता एवं गृह क्लेश का सम्पूर्ण नाश।
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