भगवान श्री विष्णु जी की आरती
Lord Vishnu Aarti • 3 पावन पद
"ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे"
समस्त संसार की सबसे प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय सार्वभौमिक आरती 'ॐ जय जगदीश हरे'।
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥
Ōṁ Jaya Jagadīsha Harē, Swāmī Jaya Jagadīsha Harē. Bhakta janōṁ kē saṅkaṭa, dāsa janōṁ kē saṅkaṭa, Kṣhaṇa mēṁ dūra karē.. Ōṁ Jaya Jagadīsha Harē..
हे संपूर्ण जगत के स्वामी जगदीश प्रभु! आपकी जय हो। आप अपने अनन्य भक्तों के संकटों को क्षण मात्र में दूर कर देते हैं।
Victory to You, Lord of the Universe, who removes the tribulations of devotees in an instant.
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का। सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे॥
Jō dhyāvē phala pāvē, duḥkha binasē mana kā.. Māta-pitā tuma mērē, sharaṇa gahūṁ kisakī.. Tuma pūraṇa paramātmā, tuma antaryāmī.. Ōṁ Jaya Jagadīsha Harē..
जो भी आपका ध्यान करता है, उसके मन के दुःख दूर होते हैं और सुख-संपदा प्राप्त होती है। आप ही हमारे माता-पिता, सर्वव्यापी अंतर्यामी परमात्मा और स्वामी हैं।
Whoever meditates on You receives joyful fruits; You are our parent, supreme soul, indweller, and eternal protector.
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ तुम हो एक अगोचर, सब के प्राणपति। किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे॥
Tuma karuṇā kē sāgara, tuma pālanakartā.. Dīnabandhu dukahahartā, tuma ṭhākura mērē.. Viṣhaya vikāra miṭāō, pāpa harō dēvā.. Śhraddhā bhakti baṛhāo, santana kī sēvā.. Ōṁ Jaya Jagadīsha Harē..
हे दयासागर! हमारे सांसारिक विकारों और पापों को नष्ट करें, हमारे भीतर श्रद्धा, भक्ति और संतों की सेवा का भाव जाग्रत करें।
Ocean of compassion, eradicate our shortcomings, absolve sins, and foster pure faith, devotion, and selfless service.
गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा अथवा सत्यनारायण कथा के पश्चात पूर्ण श्रद्धा से गायन करें।
समस्त संकटों का निवारण, सुख-सम्पत्ति, मनोकामना सिद्धि, पारिवारिक आनंद एवं जीवन में शांति।
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