भगवान विश्वकर्मा जी की आरती
Lord Vishwakarma Aarti • 1 पावन पद
"ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा"
समस्त सृष्टि के दिव्य वास्तुकार, शिल्पकला एवं यंत्र-शस्त्रों के जनक भगवान विश्वकर्मा जी की आरती।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा। सकल सृष्टि के कर्ता, वास्तु शास्त्र धर्मा॥ स्वर्ण द्वारिका रची, इन्द्रपुरी विशाला। पुष्पक विमान रच्यो, प्रभु दीन दयाला॥ शिल्प कला के स्वामी, तुम त्रिभुवन राजी। कृपा करो हम सब पर, देव विश्वकर्मा॥ जो जन आरती गावे, ध्यान लगावे। विद्या शिल्प हुनर सब, सुख सम्पति पावे॥
Ōṁ Jaya Shrī Vishvakarmā, Prabhu Jaya Shrī Vishvakarmā. Sakala sr̥ṣhṭi kē kartā, vāstu shāstra dharmā.. Svarṇa Dvārikā rachī, Indrapurī vishālā.. Vidhyā shilpa hunara saba, sukha sampati pāvē..
स्वर्ण द्वारिका और देवलोक की रचना करने वाले, शिल्प एवं वास्तु के स्वामी भगवान विश्वकर्मा जी की आरती से कौशल व समृद्धि की प्राप्ति होती है।
Architect of golden Dwarka and celestial cities; singing His Aarti grants mastery in skills and thriving prosperity.
विश्वकर्मा जयंती अथवा कन्या संक्रांति पर समस्त औजारों व यंत्रों का पूजन कर आरती करें।
व्यवसाय, कल-कारखानों, तकनीक, वास्तु निर्माण एवं शिल्पकला में उन्नति व सफलता।
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