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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 8 • Mantra 37

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 8 • मन्त्र 37

10.8.37

Mantra ID: 10.8.37

यो वि॒द्यात्सूत्रं॒ वित॑तं॒ यस्मि॒न्नोताः॑ प्र॒जा इ॒माः । सूत्रं॒ सूत्र॑स्य॒ यो वि॒द्याद्स वि॑द्या॒द्ब्राह्म॑णं म॒हत् ॥ (३७)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.8.37 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस में सारी प्रजाएं पिरोई हुई हैं तथा जो इस फैले हुए सूत्र अर्थात्‌ धागे को जानता है. संसार रूपी विस्तृत सूत्र के कारण बने हुए सूत्र अर्थात्‌ परमात्मा को जो जानता है, वही महान ब्रह्म को जानता है अथवा वही विशाल वेद मंत्रों का ज्ञाता है. (३७)

EN English Translation

In which all the subjects are threaded and who knows this spread formula i.e. thread. The one who knows the Sutra i.e. God, who is made due to the detailed formula of the world, knows the great Brahman or he is the knower of the huge Veda mantras. (37)

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