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अथर्ववेद

Kanda 13 • Sukta 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 13

Kanda 13 • Sukta 3

26 Mantras Loaded
Mantra 13.3.1

य इ॒मे द्यावा॑पृथि॒वी ज॒जान॒ यो द्रापिं॑ कृ॒त्वा भुव॑नानि॒ वस्ते॑ । यस्मि॑न्क्षि॒यन्ति॑ प्र॒दिशः॒ षडु॒र्वीर्याः प॑त॒ङ्गो अनु॑ वि॒चाक॑शीति । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (१)

हि हिन्दी अनुवाद

इस आकाश और पृथ्वी को उन्होंने प्रकट किया जो सभी लोकों को आच्छादित करते हैं, जिन में छह उर्वियां और दिशाएं निवास करती हैं. जिन दिशाओं को वे ही प्रकाशित करते हैं, उन क्रोधपूर्ण सूर्य का जो अपमान करता है अथवा विद्वान्‌ ब्राह्मण की हिंसा करता है अथवा कष्ट देता है, हे रोहित देव! तुम उस को कंपित करो तथा उसे क्षीण करते हुए बंधन में डाल दो. (१)

EN English Translation

He revealed this sky and earth that covers all the worlds, in which six bodies and directions reside. The directions he illuminates, the angry sun that insults the learned Brahmin, who commits violence or suffering, O Rohit Dev! You make him tremble and weaken him and put him in bondage. (1)

Mantra 13.3.2

यस्मा॒द्वाता॑ ऋतु॒था पव॑न्ते॒ यस्मा॑त्समु॒द्रा अधि॑ वि॒क्षर॑न्ति । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (२)

हि हिन्दी अनुवाद

जिस देवता के प्रभाव से वायु ऋतुओं के अनुसार चलती है तथा समुद्र प्रभावित होते हैं, क्रोध में भरे हुए सूर्य का जो अपमान करता है अथवा विद्वान्‌ ब्राह्मण की हिंसा करता है, हे रोहित देव! उस ब्रह्मघाती को कंपित करते हुए क्षीण करो और बंधन में डाल दो. (२)

EN English Translation

The deity under whose influence the air moves according to the seasons and the seas are affected, who insults the sun full of anger or does violence to the learned Brahmin, O Rohit Dev! Weaken that brahmaghati by staggering and put it in bondage. (2)

Mantra 13.3.3

यो मा॒रय॑ति प्रा॒णय॑ति॒ यस्मा॑त्प्रा॒णन्ति॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑ । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (३)

हि हिन्दी अनुवाद

जो मनुष्य में प्राण भरते हैं, जो मनुष्य की हिंसा करते हैं, उन के द्वारा सभी प्राणी श्वास लेते और प्रश्नास के रूप में छोड़ते हैं, क्रोध में भरे उस देवता का जो अपमान करता है अथवा विद्वान्‌ ब्राह्मण की हिंसा करता है, उस ब्रह्मघाती को कंपित करते हुए हे रोहित देव! क्षीण करो एवं बंधन में डालो. (३)

EN English Translation

Those who infuse life in man, through those who commit violence against man, all beings breathe and leave in the form of question, who insults that god full of anger or commits violence of a learned Brahmin, trembling that Brahmaghati, O Rohit Dev! Weaken and put in bondage. (3)

Mantra 13.3.4

यः प्राणे॑न॒ द्यावा॑पृथि॒वी त॒र्पय॑त्यपा॒नेन॑ समु॒द्रस्य॑ ज॒ठरं॒ यः पिप॑र्ति । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (४)

हि हिन्दी अनुवाद

जो देवता प्राण, आकाश और पृथ्वी को तृप्त करता है तथा अपमान से समुद्र के पेट को पालता है, क्रोध में भरे उस के अपराधी और विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव कंपित करते हुए क्षीण बनाओ एवं बंधन में डालो. (४)

EN English Translation

The god who satisfies the life, the sky and the earth and nurtures the stomach of the sea with humiliation, make the violent of his criminal and learned Brahmin filled in anger, O Rohit Dev, staggering and put it in bondage. (4)

Mantra 13.3.5

यस्मि॑न्वि॒राट्प॑रमे॒ष्ठी प्र॒जाप॑तिर॒ग्निर्वै॑श्वान॒रः स॒ह प॒ङ्क्त्या श्रि॒तः । यः पर॑स्य प्रा॒णं प॑र॒मस्य॒ तेज॑ आद॒दे । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (५)

हि हिन्दी अनुवाद

जिस में विराट परमेष्ठी वैश्वानर पंक्ति, प्रजा और अग्नि सहित निवास करते हैं, जिस ने उत्कृष्ट प्राण के महान तेज को धारण किया है, उन क्रोधवंत देवता के अपराधी तथा विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! कंपित करते हुए क्षीण करो तथा अपने बंधन में बांध लो. (५)

EN English Translation

In which Virat Parmeshti Resides with Vaishvanar Row, Subjects and Agni, who has possessed the great glory of the excellent soul, the criminal of those angry gods and the violent of the learned Brahmin, O Rohit Dev! Weaken by staggering and tie in your bond. (5)

Mantra 13.3.6

यस्मि॒न्षडु॒र्वीः पञ्च॒ दिशो॒ अधि॑श्रि॒ताश्चत॑स्र॒ आपो॑ य॒ज्ञस्य॒ त्रयो॒ऽक्षराः॑ । यो अ॑न्त॒रा रोद॑सी क्रु॒द्धश्चक्षु॒षैक्ष॑त । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (६)

हि हिन्दी अनुवाद

पांच दिशाएं, छह उर्वियां, चार जलों तथा यज्ञ के तीन अक्षर जिस में आश्रित हैं, जो आकाश और पृथ्वी के मध्य अपने क्रोधपूर्ण नेत्र से देखता है, उस क्रोधवान देवता के अपराधी तथा विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! कंपित करते हुए क्षीण बनाओ और अपने पाश में बांध लो. (६)

EN English Translation

O Rohit Dev, the criminal of the angry deity and the violent of the learned Brahmin, the five directions, the six urvis, the four waters and the three letters of the yajna in which they are dependent, who sees with his angry eye between the sky and the earth, O Rohit Dev! Make the staggering attenuated and tie in your loop. (6)

Mantra 13.3.7

यो अ॑न्ना॒दो अन्न॑पतिर्ब॒भूव॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॑रु॒त यः । भू॒तो भ॑वि॒ष्यद्भुव॑नस्य॒ यस्पतिः॑ । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (७)

हि हिन्दी अनुवाद

जो ब्रह्मणस्पति हैं, जो अन्न के पालक और भक्षक हैं, जो भूत, भविष्य और लोक के स्वामी हैं, उन क्रोधयुक्त देव के अपराधी तथा विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! कंपित करते हुए क्षीण बनाओ तथा अपने पाशों में बांध लो. (७)

EN English Translation

Those who are Brahmanaspati, who are the guardians and eaters of food, who are the masters of the past, the future and the world, the criminal of those angry gods and the violent of the learned Brahmin, O Rohit Dev! Make the weak by staggering and tie it in your loops. (7)

Mantra 13.3.8

अ॑होरा॒त्रैर्विमि॑तं त्रिं॒शद॑ङ्गं त्रयोद॒शं मासं॒ यो नि॒र्मिमी॑ते । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (८)

हि हिन्दी अनुवाद

जिन्होंने तीन दिनरात्रि का समूह बना कर तेरहवें अधिक मास का निर्माण किया, ऐसे क्रोधयुक्त देव के अपराधी और विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! कंपित करते हुए क्षीण बनाओ तथा उसे अपने पाशों में बांध लो. (८)

EN English Translation

Those who formed the thirteenth more month by forming a group of three days and nights, o Rohit Dev, the criminal of such an angry god and the violent of the learned Brahmin! Make it weak by staggering and tie it in your loops. (8)

Mantra 13.3.9

कृ॒ष्णं नि॒यानं॒ हर॑यः सुप॒र्णा अ॒पो वसा॑ना॒ दिव॒मुत्प॑तन्ति । त आव॑वृत्र॒न्त्सद॑नादृ॒तस्य॑ । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (९)

हि हिन्दी अनुवाद

सूर्य की सुंदर रश्मियां जल को सोख कर स्वर्ग में जाती हैं तथा दक्षिणायन में जल स्थान से लौटती हैं, उन क्रोध वाले देव के अपराधी एवं विद्वान्‌ ब्राह्मणों के हिंसक को हे रोहितदेव! कंपित करते हुए क्षीण बनाओ तथा अपने पाशं में बांध लो. (९)

EN English Translation

The beautiful rays of the sun go to heaven after absorbing the water and return from the water place in Dakshinayan, O Rohitdev, the criminals of those angry gods and the violent of the learned Brahmins! Make the weak by staggering and tie it in your loop. (9)

Mantra 13.3.10

यत्ते॑ च॒न्द्रं क॑श्यप रोच॒नाव॒द्यत्सं॑हि॒तं पु॑ष्क॒लं चि॒त्रभा॑नु॒ । यस्मि॒न्त्सूर्या॒ आर्पि॑ताः स॒प्त सा॒कम् । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (१०)

हि हिन्दी अनुवाद

हे कश्यप! तुम्हारे रोचमान चित्रभानु में सात सूर्य एक साथ रहते हैं. ऐसे क्रोधवंत देव के अपराधी तथा विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! कंपित करते हुए क्षीण बनाओ और अपने पाशों में बांध लो. (१०)

EN English Translation

O Kashyap! Seven suns live together in your Rochman Chitrabhanu. O Rohit Dev, the criminal of such an angry God and the violent of the learned Brahmin! Make staggering decay and tie in your loops. (10)

Mantra 13.3.11

बृ॒हदे॑न॒मनु॑ वस्ते पु॒रस्ता॑द्रथन्त॒रं प्रति॑ गृह्णाति प॒श्चात् । ज्योति॒र्वसा॑ने॒ सद॒मप्र॑मादम् । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (११)

हि हिन्दी अनुवाद

जिस के अनुकूल रह कर बृहत्‌ आच्छादन करता और रथंतर उसे धारण करता है, वे दोनों ही जातियों से सदैव ढके रहते हैं. ऐसे क्रोधवंत देव के अपराधी एवं विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! तुम कंपित करते हुए क्षीण बनाओ अपने पाशों से बांध दो. (११)

EN English Translation

The one who is compatible with which the great cover and the charioteer holds it, they are always covered with both jatis. O Rohit Dev, the criminal of such an angry God and the violent of the learned Brahmin! Make you staggered while tying it to your loops. (11)

Mantra 13.3.12

बृ॒हद॒न्यतः॑ प॒क्ष आसी॑द्रथन्त॒रम॒न्यतः॒ सब॑ले स॒ध्रीची॑ । यद्रोहि॑त॒मज॑नयन्त दे॒वाः । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (१२)

हि हिन्दी अनुवाद

देवताओं द्वारा रोहित को उत्पन्न करने के समय बृहत्‌ एक ओर तथा रथंतर दूसरी ओर हुए. ये दोनों ही शक्तिशाली और साथ रहने वाले पक्ष हैं. इस क्रोधवंत देव के अपराधी और विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! कंपित करते हुए क्षीण बनाओ तथा अपने बंधन में बांध लो. (१२)

EN English Translation

At the time of the creation of Rohith by the gods, Brihat was on one side and Rathantar on the other side. Both of these are powerful and co-living sides. O Rohit Dev, the criminal of this angry God and the violent of the learned Brahmin! Staggering and make it weak and tie it in your bond. (12)

Mantra 13.3.13

स वरु॑णः सा॒यम॒ग्निर्भ॑वति॒ स मि॒त्रो भ॑वति प्रा॒तरु॒द्यन् । स स॑वि॒ता भू॒त्वान्तरि॑क्षेण याति॒ स इन्द्रो॑ भू॒त्वा त॑पति मध्य॒तो दिव॑म् । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च पाशान् ॥ (१३)

हि हिन्दी अनुवाद

वे वरुण देव सायं समय अग्नि होते हैं और प्रातःकाल उदित होते हुए मित्र बन जाते हैं. वे सविता के रूप से अंतरिक्ष में तथा इंद्र के रूप में स्वर्ग में स्थित रहते हैं. ऐसे क्रोधवंत देव का जो अपराध करता है और विद्वान्‌ ब्राह्मण की हिंसा करता है, उसे हे रोहित देव! तुम कंपित करते हुए क्षीण बनाओ तथा अपने पाशं में बांध लो. (१३)

EN English Translation

That Varun Dev is agni in the evening and becomes a friend in the morning. He lives in space as Savita and in heaven as Indra. The one who commits the crime of such an angry God and commits violence against the learned Brahmin, O Rohit Dev! You vibrate and make it weak and tie it in your loop. (13)

Mantra 13.3.14

स॑हस्रा॒ह्ण्यं विय॑तावस्य प॒क्षौ हरे॑र्हं॒सस्य॒ पत॑तः स्व॒र्गम् । स दे॒वान्त्सर्वा॒नुर॑स्युप॒दद्य॑ सं॒पश्य॑न्याति॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑ । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (१४)

हि हिन्दी अनुवाद

इन पापनाशक और स्वर्गगामी सूर्य से दोनों अयन अर्थात्‌ उत्तरायण और दक्षिणायन सहस्रों दिवसों में नियमपूर्वक बंधे रहते हैं. ये सब देवताओं को अपने में लीन कर के सभी जीवों को देखते हुए चलते हैं. ऐसे क्रोधवंत देव के अपराधी और विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! तुम कंपित करते हुए क्षीण बनाओ और अपने पाशों के बंधन में डालो. (१४)

EN English Translation

Both uttarayan and dakshinayan are bound by these sinful and heavenly suns in thousands of days. All of them keep the gods in them and walk while looking at all the creatures. O Rohit Dev, the criminal of such an angry God and the violent of a learned Brahmin! Make you tremble and weaken and put it in the bondage of your loops. (14)

Mantra 13.3.15

अ॒यं स दे॒वो अ॒प्स्वन्तः स॒हस्र॑मूलः पुरु॒शाको॒ अत्त्रिः॑ । य इ॒दं विश्वं॒ भुव॑नं॒ जजा॑न । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (१५)

हि हिन्दी अनुवाद

सभी लोकों को जिन्होंने प्रकाशित किया वे देव जल में वास करते हैं. वे ही सहस्रो के मूल रूप तथा तीनों तापों अर्थात्‌ दैहिक, दैविक भौतिक से रहित अग्नि हैं. इस क्रोधवंत देव के अपराधी और विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! तुम कंपित करते हुए क्षीण बनाओ और अपने पाशों में बांध लो. (१५)

EN English Translation

Those who illuminate all the worlds, they live in god water. They are the basic form of Sahasro and the agni devoid of all three heats i.e. physical, divine physical. O Rohit Dev, the criminal of this angry God and the violent of the learned Brahmin! Make you staggered attenuated and tie in your loops. (15)

Mantra 13.3.16

शु॒क्रं व॑हन्ति॒ हर॑यो रघु॒ष्यदो॑ दे॒वं दि॒वि वर्च॑सा॒ भ्राज॑मानम् । यस्यो॒र्ध्वा दिवं॑ त॒न्वस्तप॑न्त्य॒र्वाङ्सु॒वर्णैः॑ पट॒रैर्वि भाति॑ । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (१६)

हि हिन्दी अनुवाद

स्वर्ग में अपने तेज से दमकते हुए सूर्य को उन की द्रुतगामी रशिमियां निर्मल रस प्राप्त कराती हैं उन की देह के ऊर्ध्व भाग रूप रशिमियां स्वर्ग को संतप्त करती हैं. जो स्वर्णिम रश्मियों द्वारा प्रकाश फैलाते हैं, उन क्रोधवंत देव के अपराधी तथा विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! तुम कंपित करते हुए क्षीण बनाओ और अपने पाशों से बांध दो. (१६)

EN English Translation

While shining with its brightness in heaven, their fast rashamis get pure juice, the upper part of their body, the rashhimis curse heaven. Those who spread light through golden rays, o Rohit Dev, the criminal of those angry gods and the violent of the learned Brahmin! Make you staggered attenuated and tie to your loops. (16)

Mantra 13.3.17

येना॑दि॒त्यान्ह॒रितः॑ सं॒वह॑न्ति॒ येन॑ य॒ज्ञेन॑ ब॒हवो॒ यन्ति॑ प्रजा॒नन्तः॑ । यदेकं॒ ज्योति॑र्बहु॒धा वि॒भाति॑ । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (१७)

हि हिन्दी अनुवाद

जिन के प्रभाव से सूर्य के अश्च सूर्य को वहन करते हैं तथा जिन के प्रभाव से विज्ञ पुरुष यज्ञ आदि कर्मो को प्राप्त होते हैं, जो एक ज्योति होते हुए भी अनेक रूप से प्रकाशमान हैं, ऐसे क्रोधवंत देव के अपराधी तथा विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! तुम कंपित करते हुए क्षीण बनाओ तथा उसे अपने पाशों से बांधो. (१७)

EN English Translation

Under whose influence the tears of the sun carry the sun and under whose influence the wise men get the sacrifice etc., which, despite being a light, are illuminated in many ways, o Rohit Dev, the criminal of such an angry God and the violent of the learned Brahmin! You vibrate and make it weak and tie it to your loops. (17)

Mantra 13.3.18

स॒प्त यु॑ञ्जन्ति॒ रथ॒मेक॑चक्र॒मेको॒ अश्वो॑ वहति स॒प्तना॑मा । त्रि॒नाभि॑ च॒क्रम॒जर॑मन॒र्वं यत्रे॒मा विश्वा॒ भुव॒नाधि॑ त॒स्थुः । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (१८)

हि हिन्दी अनुवाद

फैलने वाली किरणें अन्य जातियों को निस्तेज कर के चक्र वाले सूर्य के रथ में युक्त होती हैं. ये सूर्य सप्तऋषियों द्वारा किए हुए नमस्कार को स्वीकार कर के घूमते हैं. ये ग्रीष्म, वर्षा और हेमंत-इन तीन ऋतुओं वाले वर्ष को बनाते हैं. सब लोक इस काल के आश्रित हैं. ऐसे क्रोधवंत देवता के अपराधी तथा विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! कंपित करते हुए क्षीण बनाओ और उसे अपने पाशों से बांध लो. (१८)

EN English Translation

The rays that spread are contained in the chariot of the chakra sun, extinguishing other jatis. These suns roam around accepting the greetings performed by the saptrishis. They make up the three seasoned years of summer, rain and autumn. All people are dependent on this period. O Rohit Dev, the perpetrator of such an angry god and the violent of a learned Brahmin! Make it weak while trembling and tie it with your ribs. (18)

Mantra 13.3.19

अ॑ष्ट॒धा यु॒क्तो वह॑ति॒ वह्नि॑रु॒ग्रः पि॒ता दे॒वानां॑ जनि॒ता म॑ती॒नाम् । ऋ॒तस्य॒ तन्तुं॒ मन॑सा मि॒मानः॒ सर्वा॒ दिशः॑ पवते मात॒रिश्वा॑ । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (१९)

हि हिन्दी अनुवाद

आठ प्रकार से बहने वाले अग्नि उग्र हैं. वे देवों के पालक तथा बुद्धियों को उत्पन्न करने वाले हैं. ऐसे क्रोधवंत देव के अपराधी तथा विद्वान्‌ कंपित करते हुए क्षीण बनाओ तथा उसे अपने पाः सम्यञ्चं तन्तुं प्रदिशो नु सर्वा अन्तर्गायत्र्याममृतस्य तस्य देवस्य क्रुद्धस्यैतदागो य एवं विद्वांसं ब्राह्मणं उद्‌ वेपय रोहित प्र क्षिणीहि ब्रह्मज्यस्य प्रति गायत्री में, अमृत के गर्भ में तथा सभी दिशा करते हैं. उन क्रोधवंत देव के अपराधी तथा विद्वान्‌ कंपित करते हुए क्षीण बनाओ तथा उसे अपने पाः न्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! तुम शों से बांध दो. (१९)

EN English Translation

The agni flowing in eight types is fierce. They are the guardians of gods and the creators of the intellects. Make such an angry God weak by trembling and weakening him, and all the elements of his soul are worshiped, and all the directions are given by the swami, in the womb of nectar, in the womb of nectar, and in all directions. Make those angry gods weak by making them weak by the criminals and scholars, and make them violent of your father brahmin, O Rohit Dev! Tie it up with a sword. (19)

Mantra 13.3.20

स॒म्यञ्चं॒ तन्तुं॑ प्र॒दिशोऽनु॒ सर्वा॑ अ॒न्तर्गा॑य॒त्र्याम॒मृत॑स्य॒ गर्भे॑ । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (२०)

हि हिन्दी अनुवाद

औं में पूजनीय जलतंतु को वायु पवित्र न्‌ ब्राह्मण के हिंसक को है रोहित देव! तुम शों से बांध दो. (२०)

EN English Translation

In the air, the air to the revered water animal is the violent of the holy Brahmin, Rohit Dev! You tie it to the shaons. (20)

Mantra 13.3.21

नि॒म्रुच॑स्ति॒स्रो व्युषो॑ ह ति॒स्रस्त्रीणि॒ रजां॑सि॒ दिवो॑ अ॒ङ्ग ति॒स्रः । वि॒द्मा ते॑ अग्ने त्रे॒धा ज॒नित्रं॑ त्रे॒धा दे॒वानां॒ जनि॑मानि वि॒द्म । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (२१)

हि हिन्दी अनुवाद

हे अग्नि! हम तुम्हारी तीनों उत्पत्तियों को वाली हैं. हम तीन लोकों तथा स्वर्ग में तीन भेदों अपराधी को तथा विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहितदेव! तुम कंपित करते हुए क्षीण बनाओ तथा उसे अपने पाशों से बांध लो. जानते हैं. तुम्हारी तीनों गतियां भस्म करने को भी जानते हैं. ऐसे उन क्रोधवंत देव के. (२१)

EN English Translation

O agni! We belong to all three of your origins. We in the three worlds and in heaven, the three distinctions are criminal and the learned Brahmin violent, O Rohitdev! Make it weak while trembling and tie it with your ribs. you know. They also know how to consume all three of your motions. Such an angry God K. (21)

Mantra 13.3.22

वि य और्णो॑त्पृथि॒वीं जाय॑मान॒ आ स॑मु॒द्रमद॑धाद॒न्तरि॑क्षे । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (२२)

हि हिन्दी अनुवाद

जो उत्पन्न हो कर भूमि को आच्छादित करता है तथा जल को अंतरिक्ष में स्थिर करता है, ऐसे उस क्रोधवंत देव के अपराधी तथा विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! तुम कंपित करते हुए क्षीण बनाओ तथा अपने पाशों से बांध लो. (२२)

EN English Translation

Rohit Dev, the criminal of such an angry God who covers the land and stabilizes the water in space, is the criminal of such an angry God and the violent of a learned Brahmin! Make it weak while trembling and tie it with your ribs. (22)

Mantra 13.3.23

त्वम॑ग्ने॒ क्रतु॑भिः के॒तुभि॑र्हि॒तो॒र्कः समि॑द्ध॒ उद॑रोचथा दि॒वि । किम॒भ्यार्चन्म॒रुतः॒ पृश्नि॑मातरो॒ यद्रोहि॑त॒मज॑नयन्त दे॒वाः । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (२३)

हि हिन्दी अनुवाद

हे अग्नि! तुम ऋतु संबंधी दशों में प्रदीप्त किए जाते हो तथा स्वर्ग में अर्चना के साधन रूप बनते हो. क्या पश्निमाताओं के पुत्र मरुद्गण ने तुम्हारी पूजा की थी जो देवता रोहित देव से मिले थे. उन क्रोधवंत देव के अपराधी तथा विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! तुम कंपित करते हुए क्षीण बनाओ और अपने पाशों से बांध लो. (२३)

EN English Translation

O agni! You are illuminated in the seasonal tens and become a means of worship in heaven. Did Marudgan, the son of the Pashnimatas, worship you who met the deity Rohit Dev? O Rohit Dev, the criminal of those angry gods and the violent of the learned Brahmin! Make you staggered attenuated and tie to your loops. (23)

Mantra 13.3.24

य आ॑त्म॒दा ब॑ल॒दा यस्य॒ विश्व॑ उ॒पास॑ते प्र॒शिषं॒ यस्य॑ दे॒वाः । यो॒स्येशे॑ द्वि॒पदो॒ यश्चतु॑ष्पदः । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (२४)

हि हिन्दी अनुवाद

शारीरिक बल के प्रदाता आत्मिक बल के प्रेरक, जिन के बल की देवता आराधना करते हैं तथा जो प्राणिमात्र के स्वामी हैं, ऐसे क्रोधवंत देव के अपराधी तथा विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक को हे रोहित देव! तुम कंपित करते हुए क्षीण बनाओ तथा अपने पाशों से बांध लो. (२४)

EN English Translation

O Rohit Dev, the motivator of spiritual strength, the creator of spiritual strength, whose strength is worshiped and who is the master of the creature, the criminal of such an angry God and the violent of the learned Brahmin! You vibrate and make it weak and tie it to your loops. (24)

Mantra 13.3.25

एक॑पा॒द्द्विप॑दो॒ भूयो॒ वि च॑क्रमे॒ द्विपा॒त्त्रिपा॑दम॒भ्येति प॒श्चात् । चतु॑ष्पाच्चक्रे॒ द्विप॑दामभिस्व॒रे सं॒पश्य॑न्प॒ङ्क्तिमु॑प॒तिष्ठ॑मानः । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (२५)

हि हिन्दी अनुवाद

यह देव एक पैर वाला होने पर भी दो पैर वालों से तेज दौड़ता है, दो पैरों वाला तीन पैरों वालों के पीछे चलता है. चार पैरों वाला दो पैरों वालों तथा एक स्वर में रहने वालों की पंक्ति में देखता हुआ उन से सेवा लेता है. ऐसे उन क्रोधवंत देव के अपराधी तथा विद्वान्‌ ब्राह्मण के हिंसक ब्रह्मघाती को हे रोहितदेव! तुम कंपित करते हुए क्षीण बनाओ और उसे अपने दृढ़ पाशों से बांध लो. (२५)

EN English Translation

This Dev runs faster than two-legged even if he is one-legged, two-legged three-legged people. The four-legged man takes service from them by looking into the row of two-legged and those who live in one voice. O Rohitdev to the criminal of such an angry God and the violent brahmaghati of the learned Brahmin! You stagger, make it weak and tie it to your firm loops. (25)

Mantra 13.3.26

कृ॒ष्णायाः॑ पु॒त्रो अर्जु॑नो॒ रात्र्या॑ व॒त्सोजा॑यत । स ह॒ द्यामधि॑ रोहति॒ रुहो॑ रुरोह॒ रोहि॑तः ॥ (२६)

हि हिन्दी अनुवाद

काले रंग की रात्रि का पुत्र प्रकाशमान सूर्य हुआ है. लाल रंग वाला वह वृद्धि करने वाले सब से ऊपर चढ़ा है. वही निश्चित रूप से द्युलोक पर चढ़ता है. (२६)

EN English Translation

The son of a black night has become a shining sun. The red color is the highest of all growth. He certainly climbs the duloka. (26)