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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 17 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 17 • मन्त्र 3

5.17.3

Mantra ID: 5.17.3

हस्ते॑नै॒व ग्रा॒ह्य॑ आ॒धिर॑स्या ब्रह्मजा॒येति॒ चेदवो॑चत् । न दू॒ताय॑ प्र॒हेया॑ तस्थ ए॒षा तथा॑ रा॒ष्ट्रं गु॑पि॒तं क्ष॒त्रिय॑स्य ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.17.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यह हम को उत्पन्न करने वाली है, इस प्रकार जो कहे उस का संकल्प हाथ में ले. यह संकल्प लेने के लिए दूत को न भेजे. (३)

EN English Translation

It is going to create us, thus taking the resolution of what we say in hand. Do not send messengers to take this resolution. (3)

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