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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 22 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 22 • मन्त्र 5

5.22.5

Mantra ID: 5.22.5

ओको॑ अस्य॒ मूज॑वन्त॒ ओको॑ अस्य महावृ॒षाः । याव॑ज्जा॒तस्त॑क्मं॒स्तावा॑नसि॒ बल्हि॑केषु न्योच॒रः ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.22.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मूंज से युक्त स्थान इस ज्वर का घर है तथा वीर्य की महान वर्षा करने वाले इस के स्थान है. हे तक्मा! तू बाह्लीक देश में जितना है, उतना ही उत्पन्न हुआ है. (५)

EN English Translation

The place with moong is the home of this fever and it is the place of great rain of semen. O Takma! You have been born as much as you are in the outer land. (5)

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