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Chapter 14, Verse 10
गुणत्रयविभागयोग - प्रकृति के तीन गुण
रजस्तमश्चाभिभूय सत्त्वं भवति भारत | रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा ||१४-१०||
rajastamaścābhibhūya sattvaṃ bhavati bhārata . rajaḥ sattvaṃ tamaścaiva tamaḥ sattvaṃ rajastathā ||14-10||
HinduText AI से इस श्लोक का अर्थ समझें
अध्याय 14 श्लोक 10 का भावार्थ, अन्वय व जीवन दर्शन
T Translation
।।14.10।। हे भारत ! कभी रज और तम को अभिभूत (दबा) करके सत्त्वगुण की वृद्धि होती है, कभी रज और सत्त्व को दबाकर तमोगुण की वृद्धि होती है, तो कभी तम और सत्त्व को अभिभूत कर रजोगुण की वृद्धि होती है।।