गीता में 'निष्काम कर्म' का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या बिना किसी परिणाम की अपेक्षा के कर्म करना व्यावहारिक है?
नमस्ते विद्वतजनों, जब हम भगवद्गीता के दूसरे अध्याय का श्लोक पढ़ते हैं: *कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।* *मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्...