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10.100.7
न वो॒ गुहा॑ चकृम॒ भूरि॑ दुष्कृ॒तं नाविष्ट्यं॑ वसवो देव॒हेळ॑नम् । माकि॑र्नो देवा॒ अनृ॑तस्य॒ वर्प॑स॒ आ स॒र्वता॑ति॒मदि॑तिं वृणीमहे ॥ (७)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.100.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे देवो! हम तुम्हारे प्रच्छन्न स्थान में पाप न करें. हे वासदाता देवो! हम तुम्हारे क्रोध के निमित्त द्रोह न करें. हमें झूठे रूप की प्राप्ति न हो. मैं सबकी रक्षा करने वाली देवमाता अदिति का वरण करता हूं. (७)
EN English Translation
O God! Let us not sin in your hidden place. O God of residence! Let us not sedition for your anger. We should not get a false form. I choose Devmata Aditi, who protects everyone. (7)