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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 102 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 102 • ऋचा / मन्त्र 11

10.102.11

Mantra ID: 10.102.11

प॒रि॒वृ॒क्तेव॑ पति॒विद्य॑मान॒ट् पीप्या॑ना॒ कूच॑क्रेणेव सि॒ञ्चन् । ए॒षै॒ष्या॑ चिद्र॒थ्या॑ जयेम सुम॒ङ्गलं॒ सिन॑वदस्तु सा॒तम् ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.102.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मुद्गलानी ने परित्यक्ता स्त्री के समान शक्ति दिखाकर पति का धन प्राप्त किया. जिस प्रकार बादल धरती पर जल बरसाता है, उसी तरह मुद्गलानी ने बाण बरसाए. हम भी इसी प्रकार के सारथि द्वारा विजय प्राप्त करें. यह विजय हमें अन्न दे. (११)

EN English Translation

Mudgalani gained the wealth of the husband by showing the same power as the abandoned woman. Just as the clouds rain water on the earth, Mudglani rained arrows. We also conquer by a similar charioteer. This victory give us grain. (11)

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