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10.107.7
दक्षि॒णाश्वं॒ दक्षि॑णा॒ गां द॑दाति॒ दक्षि॑णा च॒न्द्रमु॒त यद्धिर॑ण्यम् । दक्षि॒णान्नं॑ वनुते॒ यो न॑ आ॒त्मा दक्षि॑णां॒ वर्म॑ कृणुते विजा॒नन् ॥ (७)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.107.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
दक्षिणा घोड़े, गाएं एवं मन को प्रसन्न करने वाला सोना देती है. दक्षिणा ही आत्मारूपी अन्न को देती है. विद्वान् व्यक्ति दक्षिणा को कवच के समान रक्षा का साधन बनाते हैं. (७)
EN English Translation
Dakshina gives horses, cows and gold that pleases the mind. The southerly gives the soul-like food. The learned person makes dakshina a means of defense like armor. (7)