Popular:
ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 11 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 11 • ऋचा / मन्त्र 3

10.11.3

Mantra ID: 10.11.3

सो चि॒न्नु भ॒द्रा क्षु॒मती॒ यश॑स्वत्यु॒षा उ॑वास॒ मन॑वे॒ स्व॑र्वती । यदी॑मु॒शन्त॑मुश॒तामनु॒ क्रतु॑म॒ग्निं होता॑रं वि॒दथा॑य॒ जीज॑नन् ॥ (३)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 10.11.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

भद्रा, शब्दयुक्त एवं अन्न वाली उषा यजमान के लिए आदित्य के साथ शीघ्र उदित हुई. उस समय यज्ञाभिलाषियों के ऊपर प्रसन्न होने वाले एवं देवों को बुलाने वाले अग्नि को उत्पन्न किया गया. (३)

EN English Translation

Bhadra, the worded and the foody Usha quickly got up with Aditya for the host. At that time, the agni that pleased the yajnabhilasis and calling the gods was created. (3)

卐 HinduText AI