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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 114 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 114 • ऋचा / मन्त्र 3

10.114.3

Mantra ID: 10.114.3

चतु॑ष्कपर्दा युव॒तिः सु॒पेशा॑ घृ॒तप्र॑तीका व॒युना॑नि वस्ते । तस्यां॑ सुप॒र्णा वृष॑णा॒ नि षे॑दतु॒र्यत्र॑ दे॒वा द॑धि॒रे भा॑ग॒धेय॑म् ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.114.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

चार कोनों वाली वेदीरूपी युवती शोभन अंलकारों वाली, घी से चिकनी एवं स्तोत्रों को धारण करने वाली है. उस पर हव्यदाता यजमान एवं पुरोहितरूपी दो पक्षी बैठते हैं एवं देवगण अपना भाग प्राप्त करते हैं. (३)

EN English Translation

The four-cornered altar-like young woman is adorned with antlers, smooth with ghee and wearing hymns. On it sit two birds of the husband's host and priestly form and the devas receive their share. (3)

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