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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 116 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 116 • ऋचा / मन्त्र 7

10.116.7

Mantra ID: 10.116.7

इ॒दं ह॒विर्म॑घव॒न्तुभ्यं॑ रा॒तं प्रति॑ सम्रा॒ळहृ॑णानो गृभाय । तुभ्यं॑ सु॒तो म॑घव॒न्तुभ्यं॑ प॒क्वो॒३॒॑ऽद्धी॑न्द्र॒ पिब॑ च॒ प्रस्थि॑तस्य ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.116.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे धनस्वामी इंद्र! यह हव्य तुम्हारे लिए अर्पित है. हे भली प्रकार सुशोभित इंद्र! इसे क्रोध किए बिना ग्रहण करो. तुम्हारे लिए सोमरस निचोड़ा गया है एवं पुरोडाश पकाया गया है. अपने समीप आए हुए इस द्रव्य का तुम उपभोग करो. (७)

EN English Translation

O Dhanaswami Indra! This havya is offered to you. O well-beautified Indra! Assume it without anger. For you the somras has been squeezed and the purodash has been cooked. You should consume this matter that has come near you. (7)

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