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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 119 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 119 • ऋचा / मन्त्र 4

10.119.4

Mantra ID: 10.119.4

उप॑ मा म॒तिर॑स्थित वा॒श्रा पु॒त्रमि॑व प्रि॒यम् । कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑ ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.119.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस प्रकार गाय रंभाती हुई बछड़े के पास जाती है, उसी प्रकार स्तुतियां मेरे पास आती हैं. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (४)

EN English Translation

Just as the cow goes to the fastening calf, so so the praises come to me. I've been to sompan several times. (4)

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