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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 121 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 121 • ऋचा / मन्त्र 10

10.121.10

Mantra ID: 10.121.10

प्रजा॑पते॒ न त्वदे॒तान्य॒न्यो विश्वा॑ जा॒तानि॒ परि॒ ता ब॑भूव । यत्का॑मास्ते जुहु॒मस्तन्नो॑ अस्तु व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम् ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.121.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्रजापति! तुम्हारे अतिरिक्त दूसरा कोई भी इन समस्त उत्पन्न भूतों को अधीन नहीं कर सका. हम जिस कामना से तुम्हारा हवन करते हैं, वह हमें प्राप्त हो तथा हम धनों के स्वामी बनें. (१०)

EN English Translation

O Prajapati! No one other than you could subjugate all these created ghosts. May the desire with which we perform your havan be received by us and we may be the masters of the riches. (10)

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