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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 122 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 122 • ऋचा / मन्त्र 8

10.122.8

Mantra ID: 10.122.8

नि त्वा॒ वसि॑ष्ठा अह्वन्त वा॒जिनं॑ गृ॒णन्तो॑ अग्ने वि॒दथे॑षु वे॒धसः॑ । रा॒यस्पोषं॒ यज॑मानेषु धारय यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.122.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! वसिष्ठपुत्र यज्ञों में अनुष्ठान आरंभ करके तुम्हारी स्तुति करते हैं एवं अन्न प्रदान करते हैं. तुम यजमानों के घरों में अधिक अन्न रखो एवं कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (८)

EN English Translation

O agni! Vasishtaputra initiates rituals in the yagnas and praises you and provides you with food. Keep more food in the houses of the hosts and protect us forever by means of welfare. (8)

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