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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 143 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 143 • ऋचा / मन्त्र 5

10.143.5

Mantra ID: 10.143.5

यु॒वं भु॒ज्युं स॑मु॒द्र आ रज॑सः पा॒र ई॑ङ्खि॒तम् । या॒तमच्छा॑ पत॒त्रिभि॒र्नास॑त्या सा॒तये॑ कृतम् ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.143.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सत्यरूप अश्चिनीकुमारो! तुमने सागर में गिरे हुए और तंरगों पर डूबते-उतराते भुज्यु ऋषि की रक्षा सौ डांड़ों वाली नौका द्वारा की एवं उन्हें यज्ञ करने योग्य बनाया. (५)

EN English Translation

O Satyarup Aschinikumaro! You protected the sage Bhuju, who had fallen into the sea and was sinking on the strings, by a boat of a hundred stalks and made them capable of performing yajna. (5)

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