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10.149.3
प॒श्चेदम॒न्यद॑भव॒द्यज॑त्र॒मम॑र्त्यस्य॒ भुव॑नस्य भू॒ना । सु॒प॒र्णो अ॒ङ्ग स॑वि॒तुर्ग॒रुत्मा॒न्पूर्वो॑ जा॒तः स उ॑ अ॒स्यानु॒ धर्म॑ ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.149.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जिन देवों का यज्ञ मरणरहित एवं स्वर्ग में उत्पन्न सोम द्वारा पूरा होता है, वे सविता के बाद में जन्मे हैं. शोभन पंखों वाले गरुड़ सविता से पहले जन्मे हैं. इसी कारण गरुड़ सविता को धारण करके वर्तमान हैं. (३)
EN English Translation
The devas whose yajna is completed by the godless and heavenly mon are born after Savita. Shobhan is born before the winged Garuda Savita. That is why garudas are present by holding Savita. (3)