Rigveda Quick Jump
Navigate to any Mandal or Mantra / Rik
10.155.5
परी॒मे गाम॑नेषत॒ पर्य॒ग्निम॑हृषत । दे॒वेष्व॑क्रत॒ श्रवः॒ क इ॒माँ आ द॑धर्षति ॥ (५)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 10.155.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
इन देवों ने पणियों द्वारा चुराई गई गायों को छुड़ाया है, अग्नि को अनेक स्थानों में स्थापित किया है एवं देवों को अन्न दिया है. इन पर कौन आक्रमण कर सकता है? (५)
EN English Translation
These gods have rescued the cows stolen by the pangs, installed the agni in many places and given food to the gods. Who can attack them? (5)