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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 156 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 156 • ऋचा / मन्त्र 4

10.156.4

Mantra ID: 10.156.4

अग्ने॒ नक्ष॑त्रम॒जर॒मा सूर्यं॑ रोहयो दि॒वि । दध॒ज्ज्योति॒र्जने॑भ्यः ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.156.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम सदा चलने वाले जरारहित तथा लोगों को प्रकाश देने वाले सूर्य को आकाश में स्थित करो. (४)

EN English Translation

O agni! "You place in the sky the sun, which is always moving, unharmed and which gives light to the people. (4)

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