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10.159.4
येनेन्द्रो॑ ह॒विषा॑ कृ॒त्व्यभ॑वद्द्यु॒म्न्यु॑त्त॒मः । इ॒दं तद॑क्रि देवा असप॒त्ना किला॑भुवम् ॥ (४)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.159.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे देवो! इंद्र जिस यज्ञ के द्वारा शक्तिशाली एवं उत्तम अन्न वाले बने हैं, मैंने वही किया है. इससे मैं शत्रुविहीन हो गई हूं. (४)
EN English Translation
Oh, God! I have done the yajna by which Indra has become powerful and good food. This has made me hostile. (4)