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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 16 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 16 • ऋचा / मन्त्र 5

10.16.5

Mantra ID: 10.16.5

अव॑ सृज॒ पुन॑रग्ने पि॒तृभ्यो॒ यस्त॒ आहु॑त॒श्चर॑ति स्व॒धाभिः॑ । आयु॒र्वसा॑न॒ उप॑ वेतु॒ शेषः॒ सं ग॑च्छतां त॒न्वा॑ जातवेदः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.16.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! जो मरा हुआ व्यक्ति तुम्हारी आहुति बनकर स्वधा शब्द के साथ ऊपर जाता है, उसे पितरों के समीप जाने की प्रेरणा दो. इसके शरीर का शेष भाग जीवन प्राप्त करे. हे जातवेद अग्नि! यह व्यक्ति शरीर से पुनः मिले. (५)

EN English Translation

O agni! The dead person who goes up with the word 'swadha' as your sacrifice, inspire him to go near the fathers. The rest of its body receives life. O Jativeda Agni! This person met the body again. (5)

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