Rigveda Quick Jump
Navigate to any Mandal or Mantra / Rik
10.165.4
यदुलू॑को॒ वद॑ति मो॒घमे॒तद्यत्क॒पोतः॑ प॒दम॒ग्नौ कृ॒णोति॑ । यस्य॑ दू॒तः प्रहि॑त ए॒ष ए॒तत्तस्मै॑ य॒माय॒ नमो॑ अस्तु मृ॒त्यवे॑ ॥ (४)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 10.165.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
उल्लू जो कहता है, वह व्यर्थ हो. यह कबूतर अग्ने के स्थान में बैठता है. यह जिसका दूत बनकर आया है, उस मृत्यु देव यम को नमस्कार है. (४)
EN English Translation
What the owl says, it should be in vain. It sits in the place of pigeon agne. He is the messenger of whom he has come as a salutation to yama, the god of death. (4)