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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 166 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 166 • ऋचा / मन्त्र 5

10.166.5

Mantra ID: 10.166.5

यो॒ग॒क्षे॒मं व॑ आ॒दाया॒हं भू॑यासमुत्त॒म आ वो॑ मू॒र्धान॑मक्रमीम् । अ॒ध॒स्प॒दान्म॒ उद्व॑दत म॒ण्डूका॑ इवोद॒कान्म॒ण्डूका॑ उद॒कादि॑व ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.166.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शत्रुओ! मैं तुम्हारा योगक्षेम छीनकर तुम्हारी अपेक्षा उत्तम हुआ हूं. मैं तुम्हारे सिर पर चढ़ गया हूं. जिस प्रकार मेंढक पानी में बोलते हैं, उसी प्रकार तुम मेरे पैरों के नीचे चीत्कार करो. (५)

EN English Translation

O enemies! I have become better than you by taking away your yogaksham. I've climbed on your head. Just as the frogs speak in the water, so do you scream under my feet. (5)

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