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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 167 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 167 • ऋचा / मन्त्र 3

10.167.3

Mantra ID: 10.167.3

सोम॑स्य॒ राज्ञो॒ वरु॑णस्य॒ धर्म॑णि॒ बृह॒स्पते॒रनु॑मत्या उ॒ शर्म॑णि । तवा॒हम॒द्य म॑घव॒न्नुप॑स्तुतौ॒ धात॒र्विधा॑तः क॒लशा॑ँ अभक्षयम् ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.167.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे धनी इंद्र! राजा सोम एवं वरुण के धर्म तथा बृहस्पति संबंधी यज्ञशाला में वर्तमान मैं तुम्हारी स्तुति में संलग्न हूं. हे धाता और विधाता! मैंने तुम्हारी आज्ञा से कलश में रखा सोम पिया है. (३)

EN English Translation

O rich Indra! At the present I am engaged in the praise of you in the yajnashala of the religion of King Som and Varuna and jupiter. O dhata and vidhata! I have drunk the mon placed in the urn by your command. (3)

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