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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 171 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 171 • ऋचा / मन्त्र 2

10.171.2

Mantra ID: 10.171.2

त्वं म॒खस्य॒ दोध॑तः॒ शिरोऽव॑ त्व॒चो भ॑रः । अग॑च्छः सो॒मिनो॑ गृ॒हम् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.171.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

तुमने भय से कांपते हुए यज्ञ का सिर शरीर से अलग कर दिया. तुम सोमरसधारी त्यट्‌ के घर गए. (२)

EN English Translation

You have separated the head of the yajna from the body, trembling with fear. You went to the house of the Somrasdhari Tyat. (2)

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