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10.174.2
अ॒भि॒वृत्य॑ स॒पत्ना॑न॒भि या नो॒ अरा॑तयः । अ॒भि पृ॑त॒न्यन्तं॑ तिष्ठा॒भि यो न॑ इर॒स्यति॑ ॥ (२)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.174.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे राजन्! शत्रुओं, सेना लेकर चढ़ाई करने वालों, दानरहित लोगों एवं हमसे द्वेष करने वालों को पराजित करो. (२)
EN English Translation
Oh, King! Defeat the enemies, those who climb with the army, those who do not donate, and those who hate us. (2)