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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 176 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 176 • ऋचा / मन्त्र 4

10.176.4

Mantra ID: 10.176.4

अ॒यम॒ग्निरु॑रुष्यत्य॒मृता॑दिव॒ जन्म॑नः । सह॑सश्चि॒त्सही॑यान्दे॒वो जी॒वात॑वे कृ॒तः ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.176.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये आने देवों के समान मानवों के भय से भी रक्षा करते हैं. यह अतिशय शक्तिशाली एवं आयुवृद्धि के लिए उत्पन्न हुए हैं. (४)

EN English Translation

These come protects from the fear of human beings like the gods. They are very powerful and have arisen for lifespan. (4)

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