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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 180 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 180 • ऋचा / मन्त्र 3

10.180.3

Mantra ID: 10.180.3

इन्द्र॑ क्ष॒त्रम॒भि वा॒ममोजोऽजा॑यथा वृषभ चर्षणी॒नाम् । अपा॑नुदो॒ जन॑ममित्र॒यन्त॑मु॒रुं दे॒वेभ्यो॑ अकृणोरु लो॒कम् ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.180.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम कष्ट से रक्षा करने वाले एवं सुंदर तेज को लेकर उत्पन्न हुए हो. हे कामपूरक इंद्र! तुम हमारे प्रति शत्रुता रखने वाले लोगों का नाश करो एवं देवों के लिए संसार को विस्तृत बनाओ. (३)

EN English Translation

O Indra! You are born of a protector from suffering and a beautiful fast. O kampoor Indra! You must destroy those who are hostile to us and make the world wide for the gods. (3)

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