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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 20 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 20 • ऋचा / मन्त्र 3

10.20.3

Mantra ID: 10.20.3

यमा॒सा कृ॒पनी॑ळं भा॒साके॑तुं व॒र्धय॑न्ति । भ्राज॑ते॒ श्रेणि॑दन् ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.20.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

स्तोता यज्ञकर्म के आधार पर ज्वाला से पहचाने जाने वाले अग्नि को बढ़ाते हैं. स्तोताओं को मनचाहा फल देने वाले अग्नि प्रकाशित होते हैं. (३)

EN English Translation

Stotas increase the agni identified by the flame on the basis of yajnakarma. The agnis that give the desired fruits to the hymns are illuminated. (3)

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