Rigveda Quick Jump
Navigate to any Mandal or Mantra / Rik
10.21.1
आग्निं न स्ववृ॑क्तिभि॒र्होता॑रं त्वा वृणीमहे । य॒ज्ञाय॑ स्ती॒र्णब॑र्हिषे॒ वि वो॒ मदे॑ शी॒रं पा॑व॒कशो॑चिषं॒ विव॑क्षसे ॥ (१)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 10.21.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अग्नि! हम कुश बिछे हुए यज्ञ की पूर्णता के लिए अपनी बनाई हुई स्तुतियों द्वारा देवों को बुलाने वाले तुम्हारा वरण करते हैं. तुम ओषधियों में सोने वाले, पवित्र दीप्तियुक्त एवं महान् हो. (१)
EN English Translation
O agni! We choose you to call upon the gods through the praises we have made for the completion of the kush-bidden yajna. You are the one who sleeps in the herbs, the holy radiant and the greatest. (1)