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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 22 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 22 • ऋचा / मन्त्र 5

10.22.5

Mantra ID: 10.22.5

त्वं त्या चि॒द्वात॒स्याश्वागा॑ ऋ॒ज्रा त्मना॒ वह॑ध्यै । ययो॑र्दे॒वो न मर्त्यो॑ य॒न्ता नकि॑र्वि॒दाय्यः॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.22.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम अपने आप उन वायु वेग से युक्त एवं सरल मार्ग पर चलने वाले घोड़ों को हांकते हुए हमारे सामने आते हो, जिनको हांकने वाला अथवा जिनकी शक्ति जानने वाला देव अथवा मनुष्य कोई भी नहीं है. (५)

EN English Translation

O Indra! You come before us, driving the horses that are wind-speed and walking on a simple path, to whom there is no god or man who knows their power. (5)

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