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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 27 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 27 • ऋचा / मन्त्र 7

10.27.7

Mantra ID: 10.27.7

अभू॒र्वौक्षी॒र्व्यु१॒॑ आयु॑रान॒ड्दर्ष॒न्नु पूर्वो॒ अप॑रो॒ नु द॑र्षत् । द्वे प॒वस्ते॒ परि॒ तं न भू॑तो॒ यो अ॒स्य पा॒रे रज॑सो वि॒वेष॑ ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.27.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ऋषि ने कहा--“हे इंद्र! तुम हमारे सामने आते हो और धरती को जल से सींचते हो. तुमने अधिक आयु पाई है. तुमने पूर्वकाल में शत्रुओं को नष्ट किया और उसके बाद भी शत्रु नष्ट किए. तुम इस विस्तृत विश्व में व्याप्त हो. द्यावा-पृथिवी दोनों तुमको नहीं नाप सकते.” (७)

EN English Translation

The sage said, "O Indra! You come before us and irrigate the earth with water. You've got older age. You destroyed the enemies in the past and then you destroyed the enemies. You are pervading this vast world. Both Dyava and Prithvi cannot measure you." (7)

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