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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 28 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 28 • ऋचा / मन्त्र 8

10.28.8

Mantra ID: 10.28.8

दे॒वास॑ आयन्पर॒शूँर॑बिभ्र॒न्वना॑ वृ॒श्चन्तो॑ अ॒भि वि॒ड्भिरा॑यन् । नि सु॒द्र्वं१॒॑ दध॑तो व॒क्षणा॑सु॒ यत्रा॒ कृपी॑ट॒मनु॒ तद्द॑हन्ति ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.28.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

“देवगण आते हैं और मेघ के वध के लिए वज्र को धारण करते हैं. वे मरुतों के साथ मेघों का भेदन करके वर्षा का जल बरसाते हैं. वे शोभन जल नदियों में धारण करते हैं. वे जहां भी जल देखते हैं, उसे वर्षा करने के लिए सोख लेते हैं.” (८)

EN English Translation

"The devas come and wear the vajra for the slaughter of the cloud. They rain water by penetrating the clouds with the maruts. They hold the shobhan water in the rivers. Wherever they see water, they soak it up to rain." (8)

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