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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 29 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 29 • ऋचा / मन्त्र 7

10.29.7

Mantra ID: 10.29.7

आ मध्वो॑ अस्मा असिच॒न्नम॑त्र॒मिन्द्रा॑य पू॒र्णं स हि स॒त्यरा॑धाः । स वा॑वृधे॒ वरि॑म॒न्ना पृ॑थि॒व्या अ॒भि क्रत्वा॒ नर्यः॒ पौंस्यै॑श्च ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.29.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र सच्चे धनदाता हैं, इसलिए पात्रों को पूरा भरकर मधुर सोमरस दो. इंद्र धरती से भी अधिक विस्तृत हैं. मानव हितकारी इंद्र अपने कार्यो और पुरुषार्थ से बढ़ते हैं. (७)

EN English Translation

Indra is a true wealth giver, so fill the characters completely and give sweet somersa. Indra is more extensive than earth. Indra, who is humanly beneficial, grows with his actions and effort. (7)

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