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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 4 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 4 • ऋचा / मन्त्र 4

10.4.4

Mantra ID: 10.4.4

मू॒रा अ॑मूर॒ न व॒यं चि॑कित्वो महि॒त्वम॑ग्ने॒ त्वम॒ङ्ग वि॑त्से । शये॑ व॒व्रिश्चर॑ति जि॒ह्वया॒दन्रे॑रि॒ह्यते॑ युव॒तिं वि॒श्पतिः॒ सन् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.4.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मूढ़ता रहित एवं ज्ञानी अग्नि! हम मूर्ख होने के कारण तुम्हारी महिमा नहीं जानते हैं, किंतु तुम हमारा महत्त्व जानते हो. अग्नि ओषधियों में निवास करते हैं एवं ज्वालारूपी जीभ से हव्य खाते हुए चलते हैं. प्रजाओं के स्वामी अग्नि आहुतियों का स्वाद लेते हैं. (४)

EN English Translation

O foolproof and wise agni! We do not know your glory because we are fools, but you know our importance. They live in agni medicines and walk with the flammatic tongue eating the havya. The masters of the people taste agni offerings. (4)

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