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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 42 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 42 • ऋचा / मन्त्र 11

10.42.11

Mantra ID: 10.42.11

बृह॒स्पति॑र्नः॒ परि॑ पातु प॒श्चादु॒तोत्त॑रस्मा॒दध॑रादघा॒योः । इन्द्रः॑ पु॒रस्ता॑दु॒त म॑ध्य॒तो नः॒ सखा॒ सखि॑भ्यो॒ वरि॑वः कृणोतु ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.42.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बृहस्पति हमें पापी शत्रु से पश्चिम, उत्तर और दक्षिण दिशाओं में बचावें. इंद्र पूर्व एवं मध्य भाग में हमारी रक्षा करें. मित्रों के मित्र इंद्र हमें धन दें. (११)

EN English Translation

Jupiter protects us from sinful enemies in the west, north and south directions. May Indra protect us in the east and central part. Friends' friend Indra give us money. (11)

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