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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 48 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 48 • ऋचा / मन्त्र 6

10.48.6

Mantra ID: 10.48.6

अ॒हमे॒ताञ्छाश्व॑सतो॒ द्वाद्वेन्द्रं॒ ये वज्रं॑ यु॒धयेऽकृ॑ण्वत । आ॒ह्वय॑माना॒ँ अव॒ हन्म॑नाहनं दृ॒ळ्हा वद॒न्नन॑मस्युर्नम॒स्विनः॑ ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.48.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैंने अधिक शक्तिशाली व दो-दो के रूप में मुझ वज्रधारी इंद्र के साथ लड़ने के लिए तैयार व युद्ध के लिए ललकारने वाले शत्रुओं को कठोर वचन कहकर मार डाला. मैं स्वयं नहीं झुका. मैंने उन्हें झुका दिया. (६)

EN English Translation

I killed the enemies who were more powerful and two-by-two, ready to fight with the thunderbolt Indra and challenging me for war, with a stern word. I didn't bend myself. I hooked them up. (6)

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