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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 61 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 13

10.61.13

Mantra ID: 10.61.13

तदिन्न्व॑स्य परि॒षद्वा॑नो अग्मन्पु॒रू सद॑न्तो नार्ष॒दं बि॑भित्सन् । वि शुष्ण॑स्य॒ संग्र॑थितमन॒र्वा वि॒दत्पु॑रुप्रजा॒तस्य॒ गुहा॒ यत् ॥ (१३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.61.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र के चारों ओर वर्तमान सेविका रश्मियां प्रकाश देने के लिए जाती हैं. इन परम शक्तिशाली इंद्रानुचरों ने नृषदपुत्र शुष्ण को नष्ट करने की इच्छा की. इंद्र अनेक प्रकार से प्रादुर्भूत शुष्ण का मर्म जानते हैं. उसका जो मर्म गुहा में छिपा है, उसे भी जानते हैं. (१३)

EN English Translation

Around Indra, the current sevika Rashmis go to give light. These most powerful Indranucharas wished to destroy The Lord's son of The Lord, Shushna. Indra knows in many ways the essence of the shushna, the son of the lord. He also knows the essence that is hidden in the cavity. (13)

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