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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 61 • Mantra / Rik 18

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 18

10.61.18

Mantra ID: 10.61.18

तद्ब॑न्धुः सू॒रिर्दि॒वि ते॑ धियं॒धा नाभा॒नेदि॑ष्ठो रपति॒ प्र वेन॑न् । सा नो॒ नाभिः॑ पर॒मास्य वा॑ घा॒हं तत्प॒श्चा क॑ति॒थश्चि॑दास ॥ (१८)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.61.18 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्वर्ग में स्थित सूर्य! तुम्हारा बंधु मैं नाभानेदिष्ट तुम्हारा कर्मधारण करता हूं एवं गायों की अभिलाषा करता हुआ तुम्हारी स्तुति करता हूं. स्वर्ग हमारा एवं सूर्य का उत्पत्तिस्थान है. मैं सूर्य से कुछ ही पीढ़ी पीछे हूं. (१८)

EN English Translation

O sun in heaven! Your brother, I do your duty and praise you while wishing for cows. Heaven is our place of origin and the sun. I'm just a few generations behind the sun. (18)

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