Popular:
ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 61 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 8

10.61.8

Mantra ID: 10.61.8

स ईं॒ वृषा॒ न फेन॑मस्यदा॒जौ स्मदा परै॒दप॑ द॒भ्रचे॑ताः । सर॑त्प॒दा न दक्षि॑णा परा॒वृङ्न ता नु मे॑ पृश॒न्यो॑ जगृभ्रे ॥ (८)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 10.61.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र ने नमुचि का वध करने के लिए संग्राम में जिस प्रकार फेन फेंका, उसी प्रकार वास्तोष्पति हमसे दूर जा रहे हैं. अंगिरागोत्रीय ऋषियों ने दक्षिणा के रूप में हमें जो गाएं दी थीं, उन्हें अल्पमन वाले वास्तोष्पति ने स्वीकार नहीं किया, जबकि वे उन्हें ग्रहण करने में समर्थ थे. (८)

EN English Translation

Just as Indra threw foam in the struggle to kill Namuchi, the Vastoshpatis are moving away from us. The songs that the Angiragotrian sages had given us as Dakshina were not accepted by the short-minded Vastospati, when they were able to accept them. (8)

卐 HinduText AI