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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 64 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 64 • ऋचा / मन्त्र 11

10.64.11

Mantra ID: 10.64.11

र॒ण्वः संदृ॑ष्टौ पितु॒माँ इ॑व॒ क्षयो॑ भ॒द्रा रु॒द्राणां॑ म॒रुता॒मुप॑स्तुतिः । गोभिः॑ ष्याम य॒शसो॒ जने॒ष्वा सदा॑ देवास॒ इळ॑या सचेमहि ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.64.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मरुद्गण अन्न वाले घर के समान देखने में सुंदर हैं. रुद्रपुत्र मरुतों की स्तुति कल्याणकारिणी है. हम गायों रूपी धन से युक्त होकर मानवों में यशस्वी बनें. हे देवो! हम सदा अन्न से युक्त हों. (११)

EN English Translation

Deserts are beautiful to look like a house with food grains. The praise of Rudraputra Maruts is beneficial. Let us be successful among human beings by having the wealth of cows. Oh, God! We are always rich in food. (11)

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